”सपना मेरा टूट गया, सोना कहीं छुट गया”
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बाबा ने कहा मंदिर में सोना (Sleep) है
सुनके सोती सरकार जाग गई
विपक्छ ने कहा सरकार जागती आँखों से सपने देखती है
सुनके बाबा की नींद में खलल पड़ गई
गेरुआ बाबा का मन आहत हुआ है
सुनके विपक्छ की नींद भाग गई
विपक्छ के सपने टूट सकते हैं
सुनके तीसरा पक्छ नीद मैं चलने लगा
तीसरा पक्छ मरा नहीं, नींद मैं भाग रहा है
सुनके आम आदमी के दल को उनके सपने साकार लगे
पर डरता हूँ, पक्छ-विपक्छ का सोना जागना
सुनके देश का सपना ही ना टूट जाए
और क्या सुनेंगे, हम/आप तो cattle class हैं
हमारी किस्मत मैं थोड़े ही ना सोना (Gold ) है